top of page

केरल की अदालत ने यौन उत्पीड़न मामले में जमानत देने के लिए भड़काऊ पोशाक का हवाला दिया।

Aug 18, 2022
1 min read

केरल के कोझीकोड की एक सत्र अदालत ने 74 वर्षीय लेखक सिविक चंद्रन को यौन उत्पीड़न के मामले में अग्रिम जमानत देते हुए कहा है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 354 ए के तहत उनके खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया नहीं होंगे यदि शिकायतकर्ता ने भड़काऊ पोशाक पहनी हुई थी।


इसने उन तस्वीरों का हवाला दिया जो चंद्रन ने अपनी जमानत याचिका के साथ पेश कीं और कहा कि उन्होंने शिकायतकर्ता को "खुद को ऐसे कपड़े पहने हुए दिखाया जो कुछ यौन उत्तेजक हैं"। इसलिए धारा 354A चंद्रन के खिलाफ नहीं होगी।


Picture for representation only

कार्यकर्ताओं ने न्यायाधीश कृष्णकुमार के आदेश की निंदा की, और केरल उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग की। दो साल पहले चंद्रन के खिलाफ कथित रूप से छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराने वाली शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने अदालत में पेश की गई तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था और वह मामले को उच्च न्यायालय में ले जाएगी।


कृष्णकुमार ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दाखिल करने में देरी पर भी सवाल उठाया, जो फरवरी 2020 में लेखकों के एक सम्मेलन के दौरान कथित छेड़छाड़ के दो साल बाद दायर की गई थी। प्राथमिकी में, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि चंद्रन ने उसे परेशान करने के लिए नियमित रूप से फोन किया और जब उसने सारी हदें पार कर दीं तो उसने शिकायत दर्ज करने का फैसला किया।


उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश कमाल पाशा ने कहा कि उन्होंने इस तरह के आदेश की कभी उम्मीद नहीं की थी और इसे अत्यधिक पक्षपाती और अनावश्यक बताया।


Comments


bottom of page